राजा नगर उदय प्रताप नारायण: सिंह
देश की आजादी के लिए 1857 में बगावत का बिगुल बजाने वाले राजा नगर उदय प्रताप सिंह ने जीते जी अंग्रेजों से हार नहीं मानी। मुखबिरों के धोखे से गिरफ्तार हुए राजा उदय प्रताप ने गोरखपुर की जेल में संतरी के बैनेट को गले में भोंग कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। दिल्ली के बादशाह ने 1857 में अग्रेंजों के खिलाफ लड़ाई का आह्वान किया तो राजा उदय प्रताप सिंह भी इस जंग में कूद पड़े। अपने बहनोई अमोढ़ा नरेश राजा जालिम सिंह सलाह-मशविरा किया। उनकी सहमति मिलने पर उदय प्रताप सिंह ने अंग्रेज सैनिकों के जल मार्ग को बाधित करने का निर्णय लिया। अपने राज से होकर गुजर रही सरयू नदी के तट पर अपने सैनिकों को तैनात कर दिया। फजाबाद की तरफ से गोरखपुर की तरफ जा रहे अंग्रेज सैनिकों की नाव पर धावा बोल कर उनके अधिकारियों की हत्या कर दी। किसी तरह एक अंग्रेज सैनिक अपनी जान बचाकर गोरखपुर पहुंचा। उसके बाद गोरखपुर से अंग्रेज सेना नगर बाजार राज पर हमला करने के लिए कूच कर गई। घुसुरिया में लगा था अंग्रेजों का बेड़ा अंग्रेजी सेना ने राजा नगर के किले से एक किमी दूर घुसुरिया गांव के पास अपनो बेड़ा लगाया। सितम्बर 1857 मे...