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कश्यप कुल आदि क्षत्रिय: राजवंश

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स्वाभिमान 🤴 शिक्षा 🌞 कश्यप कुल आदि क्षत्रिय: राजवंश ✊एकता और अनुशासन🌅 🤴जल जंगल जमीन राष्ट्र सर्वोपरि 🇮🇳 सत्यमेव जयते 🏆

प्रह्लाद के पौत्र राजा महाबलि का जीवन परिचय कश्यप क्षत्रिय:

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पौराणिक कथाओं में राजा बलि का बहुत बार उल्लेख मिलता (Raja Bali Ki Katha) हैं जो ऋषि कश्यप के कुल से थे। राजा बलि के दादा का नाम  प्रह्लाद  तथा पिता का नाम  विरोचन  (Raja Bali Kaun The) था। वह महर्षि कश्यप तथा दैत्य हिरण्यकश्यप के कुल में जन्मा एक दैत्य राजा था। वह स्वभाव से अपने दादा के समान दानवीर था किंतु उसमे दैत्यों के गुण होने के कारण अहंकार तथा अधर्म भी (Raja Bali Story In Hindi) था। आज हम आपको दानवीर महाबलि के जन्म, यज्ञ, शक्ति तथा पराक्रम के बारे में बताएँगे। प्रह्लाद के पौत्र राजा महाबलि का जीवन परिचय (Raja Bali Ki Kahani) राजा बलि का जन्म (Raja Bali Ka Janm) राजा बलि के माता-पिता का नाम विरोचन तथा विशालाक्षी था। उसके दादा प्रह्लाद थे जो भगवान विष्णु के प्रिय भक्त थे। अपने पिता विरोचन की देवराज इंद्र के द्वारा छल से हत्या कर देने के बाद राजा बलि तीनों लोकों के सम्राट बने थे। वह अत्यंत शक्तिशाली तथा पराक्रमी था तथा इसी के बल पर उसने तीनों लोकों पर अपना राज्य स्थापित कर लिया था। उसकी राजधानी दक्षिण भारत में केरल (Raja Bali Kahan Ke Raja...

कश्यप (जाति) और गोत्र

कश्यप (जाति) और गोत्र कश्यप भारत में किसानों का समुदाय हैं। कश्यप भारत की एक जाति है। इनको कई स्थानों पर कोश्यल अथवा कंशिल्य भी कहा जाता है। कश्यप जाति मुख्य रूप से हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तराखण्ड, जम्मू और कश्मीर, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान मे निवास करती है ये जाति उत्तर भारत मे अधिकांश में संख्या में है,जिन्हे कश्यप,खरवार, कहार, गौड़,(गोंड) (गोडिया) साह साहनी भर निषाद, इत्यादि नाम से जाना जाता है। उत्तर प्रदेश में ये जाति ओबीसी में आती है। कश्यप जाति पुरातन युग मे समृद्ध थी। कश्यप समाज महर्षि कश्यप महाकुल से उत्पन्न हैं। महर्षि कश्यप के वंशज होने के कारण ये कश्यप राजपूत उपनाम लगाते हैं। ये मूलरूप से शैव धर्म अथवा सनातन धर्म को मानते हैं। कश्यप समाज का इतिहास काफी प्राचीनतम हैं। क्योंकि सिंधु घाटी सभ्यताओं के जनक इनके आदिपूर्वज रहें हैं। कश्यप राजपूत सिक्ख धर्म में भी पायें जाते हैं। महापुरुष व देव महादेव शिव महर्षि कश्यप महर्षि कालू बाबा सम्राट हिरण्यकश्यप सम्राट इक्ष्वाकु सम्राट महाबली राजा वेन सम्राट वाणासुर सम्राट स्कंदवर्मन निषादराज गुह्य एकलव्...

अनुसूचित जनजाति में शामिल होने से मिलेगा लाभ

गोंड धुरिया नायक ओझा पथरी और गोंड समुदायों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का प्रस्ताव लोक सभा में पारित होने पर गोंड समाज के लोगों ने खुशी जाहिर की है। जासं, बस्ती : उत्तर प्रदेश के संत कबीरनगर, कुशीनगर, चंदौली और संत रविदास नगर जिलों में रहने वाले गोंड, धुरिया, नायक, ओझा, पथरी और गोंड समुदायों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का प्रस्ताव लोक सभा में पारित होने पर गोंड समाज के लोगों ने खुशी जाहिर की है। उनका कहना है कि अब उन्हें नौकरी, रोजगार आदि मिलने में आसानी होगी। गोंड महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष काशी प्रसाद गोंड ने बताया कि 1977 में समाज के लोगों ने खुद को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग की थी। 1990 में उन्हें अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र भी जारी हुआ, मगर समाज के अन्य लोगों को बस्ती में शासन और डीएम के निर्देश के बाद भी महज 10-12 लोगों को ही अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र जारी किया गया। इससे उनके समाज को बस्ती में वह लाभ नहीं मिल सका जिसके वे हकदार थे। फौव्वारा तिराहे पर टी स्टाल लगाने वाले राजेश कुमार गौड़ ने बताया कि बस्ती में लेखपालों ने उनके समाज के अधिकांश लोगों का यह कहकर अनु...

गोंड गौड़ या कहार

शासन ने खेल कर दिया है, कहार गोंड ही है,अशिक्षित और समाज में सम्मान पूर्वक जीवनयापन के कारण और कश्यप, शर्मा, वर्मा आदि लिखने लगे, अधिक समय बीत जाने के कारण हमारे बच्चे अपने रीति रिवाज असली जाति सब भूल गए, जबकि हमारे पूर्वज गोंड ही बताते थे, सात उपजातियों का वर्णन करते, थे, गोंड जाति का बताकर अपने को सातों उपजातियों में उच्च बताते थे।इसलिए इतिहास को देखने की जरूरत है, रीति रिवाज सभी  एक हैं, क्षेत्र का कुछ परिवर्तन अवश्य दिखाई देता है। शेष सब अपना-अपना जीवन यापन कर ही रहे हैं।

जरासंध महाभारत कालीन मगध राज्य का नरेश था। वह बहुत ही शक्तिशाली राजा था और उसका सपना चक्रवती सम्राट बनने का था। यद्यपि वह एक शक्तिशाली राजा तो था, लेकिन वह था बहुत क्रूर। अजेय हो क अपना सपना पूरा करने के लिए उसने बहुत से राजाओं को अपने कारागार में बंदी बनाकर रखा था। वह मथुरा के यदुवँशी नरेश कंस का ससुर एवं परम मित्र था उसकी दोनो पुत्रियो आसित एव्म प्रापित का विवाह कंस से हुआ था। श्रीकृष्ण से कंस वध का प्रतिशोध लेने के लिए उसने १७ बार मथुरा पर चढ़ाई की लेकिन हर बार उसे असफल होना पड़ा। जरासंध श्री कृष्ण का परम शत्रु और एक योद्धा था। . 27 संबंधों: चंद्रवंशी समाज, चीर हरण, द्रौपदी, नकुल, बिहार के महत्वपूर्ण लोगों की सूची, बृहद्रथ, भूमिहार, भीष्मक, मल्ल (कुलनाम), मल्लयुद्ध, महाभारत (२०१३ धारावाहिक), महाभारत में विभिन्न अवतार, राजगीर, शाल्व, शिशुपालवध, सभापर्व, सहदेव, मगध नरेश, स्यमंतक मणि, हिन्दी पुस्तकों की सूची/त, हिन्दी पुस्तकों की सूची/प, वाराणसी का इतिहास, गदा, गोनन्द, कर्ण, काशी का इतिहास, कंस, अखाड़ा।चंद्रवंशी समाजचंद्रवंशी समाज भारतवर्ष के प्राचीनतम क्षत्रिय समाजों में से एक है। वर्तमान समय में कर्म संबोधन यह कहार जाति के रूप में जानी जाती है। यह भारत के विभिन्न प्रांतों में विभिन्न नामों से पायी जाती है। .

राजगीरराजगीर, बिहार प्रांत में नालंदा जिले में स्थित एक शहर एवं अधिसूचीत क्षेत्र है। यह कभी मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी, जिससे बाद में मौर्य साम्राज्य का उदय हुआ। राजगृह का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। वसुमतिपुर, वृहद्रथपुर, गिरिब्रज और कुशग्रपुर के नाम से भी प्रसिद्ध रहे राजगृह को आजकल राजगीर के नाम से जाना जाता है। पौराणिक साहित्य के अनुसार राजगीर बह्मा की पवित्र यज्ञ भूमि, संस्कृति और वैभव का केन्द्र तथा जैन धर्म के 20 वे तीर्थंकर मुनिसुव्रतनाथ स्वामी के गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान कल्याणक एवं 24 वे तीर्थंकर महावीर स्वामी के प्रथम देशना स्थली भी रहा है साथ ही भगवान बुद्ध की साधनाभूमि राजगीर में ही है। इसका ज़िक्र ऋगवेद, अथर्ववेद, तैत्तिरीय उपनिषद, वायु पुराण, महाभारत, वाल्मीकि रामायण आदि में आता है। जैनग्रंथ विविध तीर्थकल्प के अनुसार राजगीर जरासंध, श्रेणिक, बिम्बसार, कनिक आदि प्रसिद्ध शासकों का निवास स्थान था। जरासंध ने यहीं श्रीकृष्ण को हराकर मथुरा से द्वारिका जाने को विवश किया था। पटना से 100 किमी दक्षिन-पूर्व में पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसा राजगीर न केवल एक प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थस्थल है बल्कि एक सुन्दर हेल्थ रेसॉर्ट के रूप में भी लोकप्रिय है। यहां हिन्दु, जैन और बौद्ध तीनों धर्मों के धार्मिक स्थल हैं। खासकर बौद्ध धर्म से इसका बहुत प्राचीन संबंध है। बुद्ध न केवल कई वर्षों तक यहां ठहरे थे बल्कि कई महत्वपूर्ण उपदेश भी यहाँ की धरती पर दिये थे। बुद्ध के उपदेशों को यहीं लिपिबद्ध किया गया गया था और पहली बौद्ध संगीति भी यहीं हुई थी। .

भूमिहारभूमिहार, भूमिहार ब्राह्मण या बाभन एक भारतीय जाति है, जो उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड तथा थोड़ी संख्या में अन्य प्रदेशों में निवास करती है। भूमिहार का अर्थ होता है "भूमिपति", "भूमिवाला" या भूमि से आहार अर्जित करने वाला (कृषक) । भूमिहार अपने आप को भगवान परशुराम का शिष्य मानते हैं, भूमिहार उत्तरप्रदेश के गाजीपुर व आजमगढ़़ जिले में सबसे ज्यादा हैं | बिहार में इनकी सबसे बड़ी आबादी है। तिवारी, त्रिपाठी, मिश्र, शुक्ल, उपाध्यय, शर्मा, पाठक दूबे, द्विवेदी आदि भूमिहर समाज की उपाधियाँ है। इसके अलावा राजपाठ और जमींदारी के कारण एक बड़ा भाग का राय, साही, सिन्हा, सिंह और ठाकुर उपनाम भी हैं। ये खेतिहर ब्राह्मण है हालांकि ब्राह्मणों का एक समुदाय भूमिहरों को ब्राह्मण मानने से इनकार करता है क्योंकि ये पूजा-पाठ का परम्परागत पेशा छोड़कर खेती करते हैं। कई विद्वानों का मानना है कि भूमिहार अंग्रेजों और मुग़लों के समय प्रमुखता से फौजी सेना में भर्ती हुए थे। इसके बदले में भूमिहरों को बड़ी सम्पत्ति मिली। चूँकि दिल्ली के आसपास रहने वाली त्यागी जाति भी अपने आप को परशुराम का शिष्य मानती है इसी से भूमिहर भी त्यागियों को अपनी ही जाति का मानते हैं। इस जाति के ज्यादातर लोग कृषक है और बाकी ब्राह्मणों की तरह दान नहीं लेते। इसलिए ये "अयाचक ब्राह्मण " कहे गए हैं। सन १८८५ में अयाचक ब्राह्मणों की महासभा की स्थापना काशी-नरेश के प्रयास से वाराणसी में हुई.