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Showing posts from July, 2022

जिनके बाप दादाओं को 1950 के पहले खटिया (कुर्सी) पे बैठने नहीं दिया जाता था वो आज पूछते है डॉ॰ बाबासाहब आंबेडकर ने किया क्या है

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जिनके बाप दादाओं को 1950 के पहले खटिया (कुर्सी) पे बैठने नहीं दिया जाता था वो आज पूछते है डॉ॰ बाबासाहब आंबेडकर ने किया क्या है 

अप्प दीपो भवः 🌎

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अप्प दीपो भवः बौद्ध दर्शन का एक सूत्र वाक्य है- ‘अप्प दीपो भव’ अर्थात अपना प्रकाश स्वयं बनो। तथागत सिद्धार्थ गौतम बुद्ध के कहने का मतलब यह है कि किसी दूसरे से उम्मीद लगाने की बजाये अपना प्रकाश (प्रेरणा) खुद बनो। खुद तो प्रकाशित हों ही, लेकिन दूसरों के लिए भी एक प्रकाश स्तंभ की तरह जगमगाते रहो। भगवान गौतम बुद्ध ने अपने प्रिय शिष्य आनन्द से उसके यह पूछने पर कि जब सत्य का मार्ग दिखाने के लिए आप या कोई आप जैसा पृथ्वी पर नहीं होगा तब हम कैसे अपने जीवन को दिशा दे सकेंगे? तो भगवान बुद्ध ने ये जवाब दिया था – “अप्प दीपो भव” अर्थात अपना दीपक स्वयं बनो ।कोई भी किसी के पथ के लिए सदैव मार्ग प्रशस्त नहीं कर सकता केवल आत्मज्ञान के प्रकाश से ही हम सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं। भगवान बुद्ध ने कहा, तुम मुझे अपनी बैसाखी मत बनाना। तुम अगर लंगड़े हो, और मेरी बैसाखी के सहारे चल लिए-कितनी दूर चलोगे?मंजिल तक न पहुंच पाओगे। आज मैं साथ हूं, कल मैं साथ न रहूंगा, फिर तुम्हें अपने ही पैरों पर चलना है। मेरी साथ की रोशनी से मत चलना क्योंकि थोड़ी देर को संग-साथ हो गया है अंधेरे जंगल में। तुम मेरी रोश...

बुद्ध सनातन

सनातन संस्कृति सृष्टि के आरंभ से सृष्टि के अंत तक  * एस धम्मो सनंतनो अर्थात यही है सनातन धर्म। बु‍द्ध का मार्ग ही सच्चे अर्थों में धर्म का मार्ग है। दोनों तरह की अतियों से अलग एकदम स्पष्ट और साफ। जिन्होंने इसे नहीं जाना उन्होंने कुछ नहीं जाना। बुद्ध को महात्मा या स्वामी कहने वाले उन्हें कतई नहीं जानते। बुद्ध सिर्फ बुद्ध जैसे हैं।बुद्ध इस भारत की आत्मा हैं। बुद्ध को जानने से भारत भी जाना हुआ माना जाएगा। बुद्ध को जानना अर्थात धर्म को जानना है । दुनिया का ऐसा कोई हिस्सा नहीं बचा था जहाँ बौद्ध भिक्षुओं के कदम न पड़े हों। दुनिया भर के हर इलाके से खुदाई में भगवान बुद्ध की प्रतिमा निकलती है। दुनिया की सर्वाधिक प्रतिमाओं का रिकॉर्ड भी बुद्ध के नाम दर्ज है। उन मुल्कों के मस्तिष्क में शांति, बुद्धि और जागरूकता नहीं है जिन्होंने बुद्ध को अपने मुल्क से खदेड़ दिया है, भविष्य में भी कभी नहीं रहेगी। शांति, बुद्धि और जागरूकता के बगैर विश्व का कोई भविष्य नहीं है, इसीलिए विद्वानों द्वारा कहा जाता रहा है कि बुद्ध ही है दुनिया का भविष्य। वही है अंतिम दार्शनिक सत्य।

मछुआ ,मांझी निषाद , गौड़ सखवार गोंड कश्यप वर्मन भोई राज समाज का इतिहास

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मछुआ ,मांझी निषाद , समाज का इतिहास जिसका कोई इतिहास नहीं उसका भी कोई भविष्य नहीं होता हैं प्रत्येक व्यक्ति  , समाज  ,  जाति ,  राष्ट्र का अपना इतिहास होता हें बिना इतिहास के कोई भी समाज आगे नहीं बढ सकता . इतिहास ही हमे बतायेगा कि हम आज भी क्यों पिछड़े हैं जिसका कोई इतिहास नहीं उसका भी कोई भविष्य नहीं होता हैं .  हमारा समाज ,  कश्यप ,  बिन्द  , मल्लाह ,  केवट  , मछुआ  , मांझी निषाद  , नाविक ,  रैकवार  , गोड़  v  मेहरा इत्यादि सेकड़ो उपजातियो में बटा है  .  ऐसा क्या कारण है कि सैकड़ो उपजातियों में बटा समाज सैकड़ों संगठन और अनेक पार्टियों में भी बटा हुआ है . इसका मुख्य कारण क्या है  ?  कश्यप ,  बिन्द  , मल्लाह ,  केवट  , मछुआ  , मांझी निषाद  , नाविक ,  रैकवार  , गोड़  v  मेहरा समाज के लोगों से बात करने पर मेरी समझ में यही आया है कि हमारा   समाज  ,   कश्यप ,  बिन्द  , मल्लाह ,  केवट  , मछुआ  , मांझी ...