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Showing posts from August, 2022

India that is a भारत

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#धम्म_लिपि_को_ब्राह्मी_लिपि_कहनेवाले_लोगोंका_एवं_ब्राह्मणी_षडयंत्र_का_पर्दाफाश..! “जब डा बाबा साहब अम्बेडकर ने “भारतीय संविधान लिखा तब डा बाबा साहब अम्बेडकर ने भारतीय संविधान का पहला Article लिख दिया , और उसमें कहां कि , India that is a Bharat अर्थात् इंडिया ही भारत हैं , भारत ही इंडिया हैं| डा बाबा साहब अम्बेडकर ने भारतीय संविधान का पहला आर्टिकल यह बताने के लिए लिखा दिया कि , यह देश भारत देश हैं| बाबा साहब ने ऐसा क्यों लिख दिया ? क्योंकि डा बाबा साहब अम्बेडकर यह बात अच्छी तरह से जानतें थे कि , यह ब्राह्मण लोग उनके जाने के बाद भारत तथा India का ग़लत Translation करेंगे| इसलिए बाबा साहब को कहना पड़ा था कि , यह देश भारत देश हैं| बाबा साहब ने इस देश को भारत कहने के बावजूद भी कुछ ब्राह्मणवादी लोग जानबूझकर इस देश को “हिंदूस्थान” कहते हैं| जबकि सच्चाई यह हैं कि , आज की समय में भारत देश म अलग-अलग जाति संप्रदाय एवं धर्म के लोग रहते हैं| डा बाबा साहब अम्बेडकर के समय में मुंबई को कुछ लोग गुजरात में शामिल करना चाहतें थे| तब डा बाबा साहब अम्बेडकर ने प्रबुद्ध भारत इस साप्ताहिक में ५ मई १...

गोंडवाना साम्राज्य भारत

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अखंड गोंडवाना साम्राज्य 🌎✍️ #जयजोहर #जल_जंगल_जमीन #आदिवासी_देशी_लेकीन_देश_के_मूल_निवाशी🏹 #आदिवासी 👑मध्य भारत में ऐतिहासिक क्षेत्र गोंडवाना , जिसमें मध्य प्रदेश , तेलंगाना , आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों के हिस्से शामिल हैं। यह द्वारा बसा हुआ है गोंड , द्रविड़ -भाषी लोगों का एक समूह है | 14वीं से 18वीं शताब्दी तक इस क्षेत्र पर शक्तिशाली गोंड राजवंशों का कब्जा था , जो मुगल काल के दौरान स्वतंत्र रहे | जब 18वीं शताब्दी में मराठों द्वारा गोंडों पर विजय प्राप्त की गई थी , तब गोंडवाना के बड़े हिस्से को नागपुर के भोंसले राजाओं या हैदराबाद के निजामों के प्रभुत्व में शामिल कर लिया गया था । कई गोंडों ने अपेक्षाकृत दुर्गम ऊंचे इलाकों में शरण ली और आदिवासी हमलावर बन गए। 1818 और 1853 के बीच इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा अंग्रेजों के पास चला गया, हालांकि कुछ छोटे राज्यों में गोंड राजाओं ने 1947 में भारतीय स्वतंत्रता तक शासन करना जारी रखा। #जोहार 

हर जोर जुल्म की टक्कर में संघर्ष हमारा नारा हैं ...🌎 जल जंगल जमीन 👑

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क्यों आवश्यक आष्टांगिक मार्ग?

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क्यों आवश्यक आष्टांगिक मार्ग? बौद्ध इसे 'काल चक्र' कहते हैं अर्थात समय का चक्र. समय और कर्म का अटूट संबंध है. कर्म का चक्र समय के साथ सदा घूमता रहता है. आज आपका जो व्यवहार है वह बीते कल से निकला हुआ है. कुछ लोग हैं जिनके साथ हर वक्त बुरा होता रहता है तो इसके पीछे कार्य-कारण की अनंत श्रृंखला है. दुःख या रोग और सुख या सेहत सभी हमारे पिछले विचार और कर्म का परिणाम हैं. तथागत बुद्ध का अष्‍टांगिक मार्ग जीवन को नई दिशा देता है. दुनिया का सबसे सरलतम दर्शन बौद्ध धम्म है, जिसे बौद्ध धर्म अपनाए बिना भी अनुसरण किया जा सकता है. बौद्ध धम्म के अनुसार,चौथे आर्य सत्य का आर्य अष्टांग मार्ग है - दुःख निरोध पाने का रास्ता है. गौतम बुद्ध कहते थे कि चार आर्य सत्य की सत्यता का निश्चय करने के लिए इस मार्ग का अनुसरण करना चाहिए. 1. सम्यक दृष्टि : इसे सही दृष्टि कह सकते हैं. इसे यथार्थ को समझने की दृष्टि भी कह सकते हैं. सम्यक दृष्टि का अर्थ है कि हम जीवन के दुःख और सुख का सही अवलोकन करें. सत्य को समझे. 2. सम्यक संकल्प : जीवन में संकल्पों का बहुत महत्व है. यदि दुःख से छुटकारा पाना हो तो दृढ़ न...

बुद्धिज्म में अवतारवाद नही माना जाता है। गौतम बुद्ध से पहले भी 27 बौद्ध हुए थे उनके नाम कुछ इस प्रकार है

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बुद्धिज्म में अवतारवाद नही माना जाता है। गौतम बुद्ध से पहले भी 27 बौद्ध हुए थे उनके नाम कुछ इस प्रकार है 28 बुद्धों के नाम  1 ) Tanhankara Buddha ( तण्हन्कर बुद्ध )  2 ) Medhankara Buddha ( मेधन्कर बुद्ध ) 3 ) Sarankara Buddha ( सरणंकर बुद्ध )  4 ) Dipankara Buddha ( दीपंकर बुद्ध )  5 ) Kondanna Buddha ( कोण्डिन्य बुद्ध )  6 ) Mangala Buddha ( मङ्गल बुद्ध )  7 ) Sumana Buddha ( सुमन बुद्ध )  8 ) Revata Buddha ( रेवत बुद्ध )  9 ) Sobhita Buddha ( सोभित बुद्ध )  10 ) Anomadassi Buddha ( अनोमदस्सी बुद्ध )  11 ) Paduma Buddha ( पदुम बुद्ध )  12 ) Narada Buddha ( नारद बुद्ध )  13 ) Padumuttara Buddha ( पदमुत्तर बुद्ध )  14 ) Sumedha Buddha ( सुमेध बुद्ध )  15 ) Sujata Buddha ( सुजात बुद्ध )  16 ) Piyadassi Buddha ( पियदस्सी बुद्ध )  17 ) Atthadassi Buddha ( अत्थदस्सी बुद्ध ) )  18 ) Dhammadassi Buddha ( धम्मदस्सी बुद्ध )  19 ) Siddhattha Buddha ( सिद्धत्थ बुद्ध )  20 ) Tissa Buddha ( ति...

नागपंचमी : बौद्ध उत्सव-नागपंचमी का सच

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नाग पंच शील का मतलब है , नाग,पंच , शील और उसका उत्सव । नाग पंचमी बौद्धो का उत्सव है जिसे बड़ी चालाकी से कटोरी चोरों ने ओबीसी एससी एसटी को मूर्ख बनाकर और बेईमानी से चुरा लिया है, नाग पंचमी तब से मनाया जाती है जब से भारत के कोने कोने में नाग वंश के राजाओं ने बौद्ध सभ्यता के प्रति अपना पूरा योगदान दिया इन महान राजाओं के याद में यह दिन मनाया जाता है। नाग एक जाती थी इसी जाति के नाग लोग भारत के मूल निवासी हैं इन्हें असुर कहा गया। नागवंशी राजा व योद्धाओ मे अनंत, बासुकी, शेष, पदम्, कवल, ककोटिक,अस्तर, शंखपाल,कालिया और पिंगल नागवीर प्रसिद्ध है। भारत में इनका ही वर्चस्व था और यह नाग भगवान बुद्ध के अनुयाई व बौद्ध धर्म के प्रचारक थे। उनका साम्राज्य भारत, यूनान ,मिश्र, चीन, जापान आदि देशों में भी रहा है। नाग वंश के बौद्ध लोग सावन की पंचमी के दिन वार्षिक पंचायत करते थे । यह पंचायत मुखिया का चुनाव के लिए होती थी। इस दिन लोग नहा धोकर अपने आराध्य देव तथागत बुद्ध की वंदना करके सुबह ही गांव के संस्थागार में एकत्र होते थे ।इनका आपसी रहन-सहन समता,एकता,न्याय और भाईचारे पर आधारित था। मुखिया तथा सं...