Posts

Showing posts from June, 2022

हिरण्यकश्यप के बारे में संपूर्ण जानकारी: पूर्व जन्म से लेकर अगले जन्म तक

Image
हिरण्यकश्यप के बारे में संपूर्ण जानकारी: पूर्व जन्म से लेकर अगले जन्म तक हिरण्यकश्यप सतयुग में जन्मा एक दैत्य राजा (Hiranyakashyap In Hindi) था जो अति-पराक्रमी तथा शक्तिशाली था। उसका जन्म महर्षि कश्यप के कुल में हुआ (Hiranyakashyap Kon Tha) था। साथ ही उसको भगवान ब्रह्मा से विचित्र वरदान मिला था। भगवान ब्रह्मा से मिले इसी वरदान के कारण स्वयं नारायण को मृत्यु लोक में अपना अवतार लेकर उसका वध करना पड़ा था। हिरण्यकश्यप के कुल में ही उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु भक्त (Hiranyakashyap Full Story In Hindi) था जो उसकी मृत्यु के पश्चात उसका उत्तराधिकारी बना था। आज हम हिरण्यकश्यप की कथा के बारे में जानेंगे। हिरण्यकश्यप का जीवन परिचय (Hiranyakashyap Story In Hindi) हिरण्यकश्यप का पूर्व जन्म (Hiranyakashyap Ki Kahani) अपने पूर्व जन्म में हिरण्यकश्यप तथा उसका छोटा भाई हिरण्याक्ष भगवान विष्णु के वैकुंठ धाम के प्रहरी थे जिनका नाम जय-विजय था। एक दिन उन्होंने भगवान ब्रह्मा के चार मानस पुत्रों का अपमान किया था तथा वैकुंठ में जाने से रोका था। तब उन्हें श्राप मिला था कि वे तीन जन्म तक असुर कुल में ...

वराह जयंती, दैत्य हिरण्याक्ष का वध करने इस रूप में अवतरित हुए थे विष्णु जी

Image
श्रीमदभगवद्गीता में एक श्लोक का वर्णन किया गया है, यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।। इसका अर्थ है जब जब धर्म की हानि होती है और अधर्म की विजय होने लगती है तब-तब मैं स्वयं जन्म लेता हूं। भगवान विष्णु के दस अवतारों की कथाएं तो हम सभी ने सुनी हैं। उन्हीं में से तीसरे अवतार हैं वराह। मान्यता है कि वराह भाद्रपद यानि भादों मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को अवरतरित हुए थे, जो कि आज है, ऐसे में आज के दिन इनकी जयंती मनाई जाती है। आइए पढ़ते हैं वराह अवतार की कथा। क्यों अवरतिरत हुए थे वराह: विष्णु जी ने वराह के रूप में तीसरा अवतार लिया था। पौराणिक कथा के अनुसार, कश्यप पत्नी एवं दैत्य माता दिति के गर्भ से हिरण्याक्ष एवं हिरण्यकशिपु का जन्म हुआ था। इनका जन्म सौ वर्षों के गर्भ के बाद हुआ था ऐसे में जन्म लेते ही इनका रूप बड़ गया था। ये विशालकाय हो गए थे। जैसे ही इनका जन्म हुआ सभी लोगों में अंधेरा छाने लग गया था। इसी दौरान हिरण्यकशिपु में अमर एवं अजेय होने की इच्छा जागृत हुई। उसने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की।ब्रह्मा जी ने प्रस...

तुम हँसों तो खुशी मुझे होती है,तुम रूठो तो आँखें मेरी रोती हैं,तुम दूर जाओ तो बेचैनी मुझे होती है,महसूस करके देखो मोहब्बत ऐसी ही होती है !!💕जब ठिकाना ही तुम हो ... तो खुशियां दुनिया में और कहा ढूंढे...❣अधुरा है 💔ईश्क मेरा तेरे नाम के बिना,जैसे अधुरी है पार्वती 🔱शिव नाम के बिना ... !!तपस्या पार्वती सी और इंतजार शिव सा दूरी जन्मों की ओर साथ सदियों का------अकेले हम ही शामील नही इस जुर्म में, नज़र जब मिली थी मुस्कुराये आप भी थे।।🤗❤️🤴------मोह होता तो बांधते तुम्हें ,💕 प्रेम है सो बंध गए तुमसे

Image