गोंड गौड़ या कहार

शासन ने खेल कर दिया है, कहार गोंड ही है,अशिक्षित और समाज में सम्मान पूर्वक जीवनयापन के कारण और कश्यप, शर्मा, वर्मा आदि लिखने लगे, अधिक समय बीत जाने के कारण हमारे बच्चे अपने रीति रिवाज असली जाति सब भूल गए, जबकि हमारे पूर्वज गोंड ही बताते थे, सात उपजातियों का वर्णन करते, थे, गोंड जाति का बताकर अपने को सातों उपजातियों में उच्च बताते थे।इसलिए इतिहास को देखने की जरूरत है, रीति रिवाज सभी  एक हैं, क्षेत्र का कुछ परिवर्तन अवश्य दिखाई देता है। शेष सब अपना-अपना जीवन यापन कर ही रहे हैं।

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