हड़प्पा सभ्यता

हड़प्पा सभ्यता के धार्मिक जीवन के बारे में अधिकांश जानकारी पुरातात्विक स्रोतों से प्राप्त होती है। जिनमें मिट्टी की मूर्तियां, पत्थर की छोटी मूर्तियां, मुहरें तथा मृद्भांड प्रमुख हैं। हड़प्पावासी एक ईश्वरीय सत्ता में विश्वास रखते थे जिसके दो रूप थे। परम् पुरुष और परम् स्त्री।

a-मातृदेवी की पूजा----

सिन्धु सभ्यता में मातृशक्ति की पूजा सर्वप्रधान थी। यहाँ से सबसे अधिक नारी की मृण्मूर्तियां प्राप्त हुई हैं। हड़प्पा से प्राप्त एक मुहर में स्त्री के गर्भ से एक पौधा निकलता हुआ दिखाया गया है। यह सम्भवतः पृथ्वी देवी की प्रतिमा है। इससे मालूम होता है कि हड़प्पाई लोग धरती को उर्वरता की देवी मानकर उसकी पूजा करते थे।

b-पशुपति की पूजा---

हड़प्पा सभ्यता में पशुपति की पूजा प्रचलित थी। मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुहर में तीन मुख्य वाला एक पुरुष ध्यान की मुद्रा में बैठा है। उसके सिर पर तीन सींग है। उसके दाहिने तरफ एक हाथी तथा एक बाघ और बायीं तरफ एक गैंडा और एक भैंसा खड़े हुए दिखाये गये हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि आज के भगवान शिव की पूजा उस समय पशुपति के रूप में होती थी।

c-पशु पूजा----

पशुओं में कूबड़ वाला साँड़ इस सभ्यता के लोगों के लिए विशेष पूजनीय था। मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुहर में संश्लिष्ट पशु की आकृति मिली है उसके तीन सिर हैं, जिसमें ऊपर के दो सिर बकरे के तथा नीचे का तीसरा सिर भैंसे का है। मार्शल के अनुसार पशुओं की पूजा शक्ति के रूप में होती थी।

d-नाग पूजा---

नाग पूजा के प्रचलन के भी संकेत मिलते हैं। मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुद्रा पर एक देवता के दोनों ओर एक एक नाग बिठाया गया है।

e-वृक्ष पूजा---

सिन्धु वासी वृक्ष पूजा दो रूपों में करते थे- जीवन्त रूप में और प्रकृति रूप में। मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुद्रा में एक पीपल के वृक्ष की दो टहनियों के बीच से एक पुरुष आकृति को निकलते हुए दिखाया गया है।

f-मूर्ति पूजा---

सिन्धु सभ्यता के किसी भी पुरास्थल के उत्खनन से मन्दिर के साक्ष्य नहीं मिले हैं। किन्तु सम्भवतः सिन्धु सभ्यता में मूर्ति पूजा प्रचलित थी। इसके उदाहरण मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुहर पर अंकित देवता की आकृति है। इसके अतिरिक्त अनेक पुरास्थलों से मातृदेवी की मृण्मूर्तियां मिली हैं।

g-अग्नि पूजा---

लोथल, कालीबंगा एवं बनवाली से अनेक हवनकुंड और यज्ञवेदियां मिली हैं। जिससे स्पष्ट होता है कि अग्नि पूजा भी प्रचलित थी।

h-भूत प्रेत में विश्वास---

सिन्धु सभ्यता से बड़ी संख्या में ताबीज मिले हैं। इससे अनुमान लगाया जाता है कि वे भूत प्रेत, जादू टोना में विश्वास करते थे।

i-अन्त्येष्टि संस्कार----

सिन्धु सभ्यता के अन्त्येष्टि संस्कार विधियों से उनके पारलौकिक जीवन मे विश्वास की पुष्टि होती है। अन्त्येष्टि संस्कार की तीन विधियां प्रचलित थी-पूर्ण समाधिकरण, आंशिक समाधिकरण, दाह संस्कार। कब्रिस्तान बस्ती से बाहर होते थे।

Comments

Popular posts from this blog

रामधारी सिंह 'दिनकर'- जब नारी किसी नर से कहे, प्रिय! तुम्हें मैं प्यार करती हूँ

गौड़ क्षत्रिय राजवंश : संक्षिप्त परिचय

हिरण्यकश्यप के बारे में संपूर्ण जानकारी: पूर्व जन्म से लेकर अगले जन्म तक