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भगवा बुद्ध समाधि क्योंलगाते थे ? 🧘‍♂️🧘‍♂️🧘‍♂️🧘‍♂️🧘‍♂️

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भगवा बुद्ध समाधि क्यों लगाते थे ?  🧘‍♂️🧘‍♂️🧘‍♂️🧘‍♂️🧘‍♂️ 🙏 समाधि में बहुत गुण हैं। सभी भगवानों ने समाधि ही से बुद्धत्व की प्राप्ति की है। वे बुद्धत्व प्राप्ति करने के बाद भी उसके अच्छे गुणों को याद करते हुये उसका प्रयोग किया करते हैं। * कोई आदमी राजा की सेवा करे। उससे प्रसन्न हो राजा उसे कोई बड़ा पुरस्कार दे दे। उस पुरस्कार को याद कर वह आदमी राजा की सेवा और भी अधिक करे। -या, कोई रोगी आदमी वैद्य के पास जाय और अपना अच्छा इलाज कराने के लिए उसे बहुत धन आदि देकर उसकी सेवा करे। इलाज होने के बाद स्वस्थ होकर भी वैद्य के किए गए उपकार को मान उसकी फिर भी सेवा करे। 🧘‍♂️ उसी तरह, सभी भगवानों ने समाधि लगाकर ही बुद्धत्व प्राप्ति की है, सो वे उसके गुणों को याद करके उसकी सेवा बुद्धत्व प्राप्ति के बाद भी करते हैं। 🧘‍♂️ समाधि के अट्ठाइस गुण हैं | जिनको देखते हुए सभी भगवान् उसका सेवन करते हैं वे ये हैं-- 🧘‍♂️ 🙏 (१) अपनी रक्षा होती है, (२) दीर्घ जीवन होता है, (३) बल बढ़ता है, (४) सभी अवगुणों का नाश हो जाता है, (५) सभी अपयश दूर हो जाते हैं (६) यश की वृद्धि होती है, (७) असंतोष ह...

धम्म धर्म

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समय किसी के लिए नही रुकता ये गतिमान है और समय समय पे बस इसको गतिमान किया जा सकता है ये परिवर्तनकारी है सत्य तो यही है की समय की कोई सीमा नहीं इसको गिना नही जा सकता और इसको वयक्त भी नही किया जा सकता केवल खुदको विलीन किया जा सकता है उस परम सत्य में अपने अन्दर धम्म (धर्म) को जगा के ❤️🧘‍♂️🧘‍♂️🧘‍♂️🌎🌻 #Buddha #Maitreya #तथागत

निषाद गोंड जातियाँ व उप जातियाँ

निषाद जातियाँ व उप जातियाँ आंध्र प्रदेश अंगिकुला क्षत्रिय, बेस्टा, बेस्टार, गंगापुत्र, गंगावार, गोंडला, जालारी, कोराचा, नाय्याला, पट्टापा, पाली, वाडवालिजा, वड्डी, जल्कशत्रिया, वैनीकुला क्षत्रिय (यनेकापु, वान रेड्डी, पल्ली कपौ, पल्ली रेड्डी) असम भोई, मल्लाह, झलो मालो, झलो, मालो, मलाकर, नममुद्र, कैबार्ता, पटना, कोटल बिहार बांध, धीमर धीमर धीवर धीवर, गोडिया, गोंड, गारी, गुरुिया, राज गोंड, केत कीट, खारवार खैरवार खेरवार, खागी, कैबार्ता, खहर, मंजी, मंजजी माधवार, निशाद, तिआर, टायर, तिआर, मल्लाह दिल्ली धीमर, धीमर, धीनवार, धीरवार, केवत, कीओट, निषाद, गोडिया, गोंड गारिया, गुरुिया, राज गोंड, कहर, झिमार, झिंवार, झिवार, झीर, झीर, मल्लाह, तुराह, तुराहा, तुरेहा, तुराहा गोवा नायक गुजरात भोई, धीरू भोईधर भोई खादीभाई, खसे भोई, जिंदा भोई पारदेशी भोई, राज भोई, धीवर, धीमर धिमर, धीवर, ढेवरा, गोंड, राज गोंड, कोली, महादेव कोली, मल्हार कोली, डोंगर कोली, कोल्चा, कोल्गा, तोकर कोली, किरत , केयर, केवत, केवत, कहर, धुरीया कहर गोंडिया खहर, खैरवार, मल्लाह, मल्हार, मखेन्द्र, मच्छवा, निशाद, टिंडेल, पालवार हरियाणा ढीमार, झी...

खत्तिय उपाधि का मतलब खेतों का मालिक है.....आगे लिखा है कि दूसरों के खेतों के रक्षक भी....महापरिनिब्बान सुत्त में लिखा है कि मोरियों ने कहा कि गोतम बुध खत्तिय थे और हम भी खत्तिय हैं..मतलब मोरिय खत्तिय थे मतलब कोलिय भी खत्तिय थे

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इतिहासकार रामशरण शर्मा ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक " प्राचीन भारत में राजनीतिक विचार एवं संस्थाएँ " ( पृ. 81 ) में लिखा है कि खत्तिय उपाधि का मतलब खेतों का मालिक है.....आगे लिखा है कि दूसरों के खेतों के रक्षक भी.... महापरिनिब्बान सुत्त में लिखा है कि मोरियों ने कहा कि गोतम बुध खत्तिय थे और हम भी खत्तिय हैं......मतलब मोरिय खत्तिय थे.... सुद्धोदन खत्तिय ने कोलिय राजा को संवाद भेजा कि हम भी खत्तिय हैं और आप भी खत्तिय हैं ( रांगेय राघव, यशोधरा जीत गई, पृ. 18) ....मतलब कोलिय भी खत्तिय थे.... तो क्या शाक्य गण, कोलिय गण, मोरिय गण--- सभी राजपूत थे?.....नहीं। मेगस्थनीज राजपूत जाति को नहीं जानता था, फाहियान और ह्वेनसांग भी राजपूत जाति से वाकिफ नहीं थे..... ग्यारहवीं सदी में भारत आए अलबेरुनी को भी नहीं पता था कि राजपूत जैसी कोई जाति है.... बारहवीं सदी के कल्हण को भी राजपूत जाति का पता नहीं था.... पंद्रहवीं सदी के महाराणा कुंभा के काल तक राजपूत जाति का कहीं उल्लेख नहीं है.... इसीलिए मैंने कहा कि खत्तिय को ही क्षत्रिय बताया गया है..... शाक्य गण के बुद्ध को तो इसी खत्तिय के आधार पर...

हड़प्पा सभ्यता

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हड़प्पा सभ्यता के धार्मिक जीवन के बारे में अधिकांश जानकारी पुरातात्विक स्रोतों से प्राप्त होती है। जिनमें मिट्टी की मूर्तियां, पत्थर की छोटी मूर्तियां, मुहरें तथा मृद्भांड प्रमुख हैं। हड़प्पावासी एक ईश्वरीय सत्ता में विश्वास रखते थे जिसके दो रूप थे। परम् पुरुष और परम् स्त्री। a-मातृदेवी की पूजा---- सिन्धु सभ्यता में मातृशक्ति की पूजा सर्वप्रधान थी। यहाँ से सबसे अधिक नारी की मृण्मूर्तियां प्राप्त हुई हैं। हड़प्पा से प्राप्त एक मुहर में स्त्री के गर्भ से एक पौधा निकलता हुआ दिखाया गया है। यह सम्भवतः पृथ्वी देवी की प्रतिमा है। इससे मालूम होता है कि हड़प्पाई लोग धरती को उर्वरता की देवी मानकर उसकी पूजा करते थे। b-पशुपति की पूजा--- हड़प्पा सभ्यता में पशुपति की पूजा प्रचलित थी। मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुहर में तीन मुख्य वाला एक पुरुष ध्यान की मुद्रा में बैठा है। उसके सिर पर तीन सींग है। उसके दाहिने तरफ एक हाथी तथा एक बाघ और बायीं तरफ एक गैंडा और एक भैंसा खड़े हुए दिखाये गये हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि आज के भगवान शिव की पूजा उस समय पशुपति के रूप में होती थी। c-पशु पूजा---- पशु...

India that is a भारत

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#धम्म_लिपि_को_ब्राह्मी_लिपि_कहनेवाले_लोगोंका_एवं_ब्राह्मणी_षडयंत्र_का_पर्दाफाश..! “जब डा बाबा साहब अम्बेडकर ने “भारतीय संविधान लिखा तब डा बाबा साहब अम्बेडकर ने भारतीय संविधान का पहला Article लिख दिया , और उसमें कहां कि , India that is a Bharat अर्थात् इंडिया ही भारत हैं , भारत ही इंडिया हैं| डा बाबा साहब अम्बेडकर ने भारतीय संविधान का पहला आर्टिकल यह बताने के लिए लिखा दिया कि , यह देश भारत देश हैं| बाबा साहब ने ऐसा क्यों लिख दिया ? क्योंकि डा बाबा साहब अम्बेडकर यह बात अच्छी तरह से जानतें थे कि , यह ब्राह्मण लोग उनके जाने के बाद भारत तथा India का ग़लत Translation करेंगे| इसलिए बाबा साहब को कहना पड़ा था कि , यह देश भारत देश हैं| बाबा साहब ने इस देश को भारत कहने के बावजूद भी कुछ ब्राह्मणवादी लोग जानबूझकर इस देश को “हिंदूस्थान” कहते हैं| जबकि सच्चाई यह हैं कि , आज की समय में भारत देश म अलग-अलग जाति संप्रदाय एवं धर्म के लोग रहते हैं| डा बाबा साहब अम्बेडकर के समय में मुंबई को कुछ लोग गुजरात में शामिल करना चाहतें थे| तब डा बाबा साहब अम्बेडकर ने प्रबुद्ध भारत इस साप्ताहिक में ५ मई १...

गोंडवाना साम्राज्य भारत

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अखंड गोंडवाना साम्राज्य 🌎✍️ #जयजोहर #जल_जंगल_जमीन #आदिवासी_देशी_लेकीन_देश_के_मूल_निवाशी🏹 #आदिवासी 👑मध्य भारत में ऐतिहासिक क्षेत्र गोंडवाना , जिसमें मध्य प्रदेश , तेलंगाना , आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों के हिस्से शामिल हैं। यह द्वारा बसा हुआ है गोंड , द्रविड़ -भाषी लोगों का एक समूह है | 14वीं से 18वीं शताब्दी तक इस क्षेत्र पर शक्तिशाली गोंड राजवंशों का कब्जा था , जो मुगल काल के दौरान स्वतंत्र रहे | जब 18वीं शताब्दी में मराठों द्वारा गोंडों पर विजय प्राप्त की गई थी , तब गोंडवाना के बड़े हिस्से को नागपुर के भोंसले राजाओं या हैदराबाद के निजामों के प्रभुत्व में शामिल कर लिया गया था । कई गोंडों ने अपेक्षाकृत दुर्गम ऊंचे इलाकों में शरण ली और आदिवासी हमलावर बन गए। 1818 और 1853 के बीच इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा अंग्रेजों के पास चला गया, हालांकि कुछ छोटे राज्यों में गोंड राजाओं ने 1947 में भारतीय स्वतंत्रता तक शासन करना जारी रखा। #जोहार